Friday, 31 October 2014
Monday, 27 October 2014
WTA में सानिया की शानदार जीत, PM मोदी ने दी बधाई
टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के लिए यह साल बहुत ही खुशियोंवाला साबित हुआ. टेनिस कोर्ट पर गजब का प्रदर्शन करके सानिया ने इस साल कई खिताब जीते. रविवार को हुए डब्ल्यूटीए फाइनल्स में सानिया ने कारा ब्लैक के साथ मिलकर महिला डबल्स का खिताब जीता. इस उपलब्धि को हासिल करनेवाली सानिया भारत की नंबर 1 महिला टेनिस खिलाड़ी बन गई हैं.
सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने टेनिस स्टार सानिया मिर्जा को डब्ल्यूटीए फाइनल्स जीतने पर बधाई देते हुए उनके शानदार प्रदर्शन की तारीफ की है. मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि डब्ल्यूटीए फाइनल्स जीतने के लिए आपको बधाई सानिया मिर्जा. यह एक और गर्व भरी उपलब्धि है. पीएम मोदी की बधाई मिलते ही सानिया ने भी तुरंत पीएम को धन्यवाद दिया.
Sunday, 26 October 2014
हरियाणा में एक और लाल: मनोहर लाल खट्टर
हरयाणा में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में श्री मनोहर लाल खट्टर ने पद और गोपिनियता की शपथ ली । श्री खट्टर हरयाणा के 10 वें मुख्यमंत्री होंगे । जाट लैंड में खट्टर नॉन जाट मुख्यमंत्री हैं ।
मनोहर लाल खट्टर का जन्म १९५४ में हरयाणा के रोहतक जिले के निन्दाना गौव में हुआ था । निन्दाना महम तहसील में है । इनके पिता श्री हरवंश लाल खट्टर १९४७ के भारत पाक विभाजन में पाकिस्तान से आये थे । इनका परिवार बाद में रोहतक के बनियानी नमक गौवं में बस गया । यंहा इनका परिवार खेती का काम करता था ।
खट्टर जी रोहतक के पंडत नेकी राम शर्मा राजकीय विद्यालय से मेट्रिक की परीक्षा उतीर्ण की । इसके बाद वे डेल्ही आ गए । यंहा वे सदर बाजार के पास अपनी दुकान खोली । उन्होंने डेल्ही विश्वविद्यालयसे बैचलर की डिग्री ली ।
१९७७ में २४ वर्ष की अवस्था में वे आरएसएस की सदस्यता ली । तिन साल बाद वे पूर्ण प्रचारक बन गए प्रचारक होने के कारण वे आजीवन अविवाहित रहे । 14 वर्षों तक वे प्रचारक की भूमिका में रहे । १९९४ में पार्टी के मुख्यधारा में शामिल हुए । २००० से २०१४ तक हरयाणा महासचिव के पद पर रहे। २०१४ के लोक सभा इलेक्शन में भाजपा हरियाणा चुनाव समिति के अध्यक्ष रहे । श्री खट्टर भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे है ।
२०१४ के हरयाणा विधान सभा चुनाव में खट्टर करनाल से विजय हुए हैं । उन्होंने अपने निकटतम प्रतिधंदी incके सुरेंदर सिंह नरवाल को ६३७३६ वोटों से पराजीत किये ।
जाट लैंड में खट्टर ने मुख्यमंत्री का ताज पहना
हरयाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतहासिक तथा अभूतपूर्व जीत के बाद श्री मनोहर लाल खट्टर पंचकुला में आयोजित भव्य मेगाशो में मुख्यमंत्री के पद तथा गोपनीयता की शपथ ली । मोदी के पुराने साथी तथा संघ प्राचारक खट्टर हरयाणा के 10 वे मुख्यमंत्री होंगे । इनके साथ 9और मंत्रियों ने भी शपथग्रहण किया । खट्टर के इन नवरत्नों में 6 कबिनेट स्तर के तथा 3 राज्यमंत्री {स्वंत्रत प्रभार } हैं । कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए पूर्व राज्यसभा सांसद बिरेंदर सिंह की पत्नी प्रेमलता को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया । ऐसे कयास लगाये जा रहे थे की उन्हें "मनो टीम "में शामिल किया जा सकता है । प्रेमलता उचाना कलां से विधायक है समारोह में पी ऍम मोदी:पार्टी अध्यक्ष अमित शाह आडवाणी मुरली मनोहरजोशी तथा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए ।
खट्टर भी "मिनिमम गवर्मेंट मैक्सिमम गवर्नेंस " के सिधांत का अनुसरण करते हुए छोटा मंत्रिमंडल का गठन किये है । ज्ञात हो की हुड्डा कल में 14 मंत्री तथा 9 सीपीए बनाये गए थे ।
समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेंदर सिंह हुड्डा तथा उनके पुत्र और रोहतक से सांसद दीपेंदर हुड्डा को भी आमंत्रित किया गया था । लेकिन वे नहीं पंहुचे मंच पर उनके लिए अलग से कुर्सियां भी लगाई। गयी थी । जब पूर्व मुख्यमंत्री से पुचा गया तो उन्होंने दावा किया की उन्हें समारोह में बुलाया ही नहीं गया ॥
अब झारखण्ड और कश्मीर की बारी
पांच चरणो में होगें चुनाव
झारखण्ड तथा जम्मू कश्मीर में 25 नवंबर से 20 दिसम्बर के बीच वोट डाले जायेंगे । मुख्या चुनाव आयुक्त वी एस संपत ने चुनाव के तारीखों की घोषणा की । २५ दिसंबर को डेल्ही के ३ सीटों लिए भी उपचुनाव होंगें
वोटों गिनती 23 दिसंबर होगी ।
जम्मू कश्मीर में चुनाव तारीखों लेकर सत्तानशीन नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आपत्ति जताई । जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्बदुल्ला ने ट्वीट करके कहा की चुनाव से पहले बाढ़ पीड़ितों के लिए पुनर्वास की आवस्यकता थी ।लेकिन चुनाव आयुक्त का मत था की जम्मू कश्मीर में आयोग ने हर पहलु से समीक्षा की । विभिन्न राजनितिक दलों से भी चर्चा हुईं जिनमे से अधिकत्तर का मत था की चुनाव होना चाहिए। आयोग उसी परिप्रेक्ष्य में फैसला लिया ।
लेकिन चुनाव आयोग के सामने जो सबसे ज्वलंत चुनौती है वो आतंकी तथा नक्सली समस्या को लेकर । दोनों राज्य क्रमशःआतंकवाद तथा नक्सली समस्या से ग्रसित है । दोनों राज्यों में एक साथ चुनाव करवाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होगी
Friday, 24 October 2014
गोवर्धन पूजा
प्रकृति हमारे जीवन का आधार है । हमारे जीवन व्यवस्था को तथा संसार को खुशहाल और समृद्ध बनाने में मनुष्यों के साथ साथ पशु पंक्षियों तथा पेड़ पौधे का अनमोल योगदान होता है। हमारे हिन्दू धर्म का दर्शन रहा है की हम प्रक्रृति के महत्व तथा उसके महत्ता को आस्था तथा श्रधा के रूप में दर्शाते है। हम अपनी आस्था तथा उनकी महत्ता को उजागर करने के लिए पेड़ पौधे तथा जानवरो को भी भगवन का दर्जा दे देते है और उन्हें पूजते है। इस परम्परा के बहुत ही अद्भुत उदहारण हम अपने धार्मिक मान्यताओ में देखते है। हम इन मान्यताओं को खास पर्व तक का रूप दे देते है जैसे नाग पंचमी गोवर्धन पूजा या नीम के या पीपल के पेड़ को धार्मिक महत्व देना । कहने के लिए तो यह बस एक धारणा मात्र है। शायद इस भौतिकवादी तथा वैज्ञानिक काल में हमें ये आतार्तिक लगे लेकिन इन उत्सवों का धार्मिक के साथ साथ सामाजिक तथा वैज्ञानिक महत्व भी है। इनका महत्व तथा ये खास उत्सव मनुष्य तथा प्रकृति बीच समन्वय तथा सहकारिता की वकालत करता है। ये धार्मिक पर्व प्रकृति तथा मनुष्य के बीच संतुलन तथा संतुलन व्यवस्थित न होने पर इनके गंभीर परिणामो की चेतावनी की कहानी तथा भविष्यवाणी करते है। ऐसी प्रकृति तथा मनुष्य के अटूट रिश्ते की कहानी दीवाली के कल हो कर मनाई जाने वाली प्रसिद्ध गोवर्धन पूजा भी कहती है। आइये आज गोवर्धन पूजा के महत्व इतिहास तथा आज के परिवेश में यह कितना महत्वपूर्ण है इसकी चर्चा करते है। गोवर्धन का दो मतलब निकलता है । एक तो गोवर्धन पर्वत जिसका पौराणिक आर्थिक तथा सामाजिक महत्व है। दूसरा अर्थ गो +वर्धन गो अर्थात गाय वर्धन का मतलब पोषण । दोनों ही अर्थ भगवन कृष्णा से सम्बंधित है। गोवर्धन पूजा को लेकर बहुत सी पौराणिक कथाएं जुडी है। कहा जाता है द्वापर में भगवन कृष्णा अवतरित हुए थे। इस कल भगवन इंद्र की पूजा होती थीं । इंद्र वर्षा के देवता माने जाते है। कहते है की इंद्र को अहंकार आ गया थ। इंद्र अपने क्रोध का भय दिखा कर खुद मान मर्यादित करवाता थ। कृष्णा को यह पसंद नहीं थ। उनका मत था इंद्र अप्रतक्ष्य देव है तथा वर्षा करवाना इनका कार्य ही है। ये कोई महत्ता नहीं है। भगवन का तर्क था की इनसे ज्यादा महत्वपूर्ण गो माता तह गोवर्धन पर्वत है। गोवर्धन गौ को भोजन की व्यवस्था करता है तथा गाय माता अमृत स्वरुप दूध दे कर हमें पोषित करती है । श्री कृष्णा ने इंद्र की पूजा बंद करवा दी इससे क्रुद्ध हो कर इंद्र गोकुल में प्रलयकारी वर्षा प्रारम्भ कर दिए । लगातार वर्षा से प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो गयी जान मानस पीड़ित होने लगे । इंद्र लगातार सात दिनों तक अपने कार्य का दुरूपयोग करता रहा । तब श्री कृष्णा अपने उंगली से गोवर्धन पर्वत उठा लिए । इस पर्वत के निचे गोकुलवासी पशुओं के साथ आकर रक्षित हुए ।अपने प्रयास में असफल हो कर इंद्र लज्जित हुआ तथा यह मान लिया की यह कोई इंसान नहीं साक्षात भगवन है। कहते है की जब इंद्र मुश्लाधार वर्षा करवा रहा था उस समय भगवन का सुदर्शन गोवर्धन के ऊपर वर्षा को नियंत्रित कर रहा था तथा शेष नाग मेड़ो तक पानी पहुँचाने का काम कर रहे थे । और उसी दिन से गोवर्धन पूजा की परंपरा विकसित हुई । गोवर्धन पूजा मुख्यतः पंजाब हरयाणा उत्तर प्रदेश तथा बिहार में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह बलि प्रतिपदा के नाम से मनाया जाता है और इस दिन पति अपनी पत्नियों को उपहार देते है। हरयाणा तथा गुजरात यह नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है क्योंकि विक्रम संवत इसी दिन से शुरू हुआ था ।
इस पूजा का उदेश्य यही है की हमें पर्वत तथा पशुओं के योगदान को स्मृति में रखना ही होगा । इसी कारण इस दिन गाय बैल को नहा कर रंग लगाया जाता है तथा गले की रस्सी को बदला है । गाय और बैल को इस दिन चावल तथा गुड खिलाया जाता है।
हम गोवर्धन पूजा का महत्व सिर्फ धार्मिक रूप में नहीं देख सकते इसके और सामाजिक तथा प्राकृतिक आयाम भी है। हम इस दिन गायों की पूजा करते है ।शास्त्रो में गाय को उतना ही पवित्र माना गया है जितना की नदियों में गंगा को । गाय को माता लक्ष्मी का स्वरुप भी कहा गया है देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृधि देती है उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रुपी धन प्रदान करती है। गाय सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय तथा आदरणीय है। हम इन्हे माँ का दर्जा देते है ।
हमारे देश में गो हत्या पर प्रतिबन्ध है पर हमारे देश के कई हिस्से में चोरी छिपे गो हत्या की जाती है । आइये हमारे हिन्दू धर्म इस अद्भुत दर्शन जिसमे हम पर्यावरण की तथा प्रकृति की सहज रिश्ते की बात करते है को एक संकल्प पर्व के रूप में मनाएं । हम एक संकल्प ले की हम अपने स्तर पर गो रक्षा की भरपूर कोशिश करेंगे तथा प्रकृति मनुष्य के सम्बन्ध को और अधिक सहज बनाने का प्रयास करेंगे
इस पूजा का उदेश्य यही है की हमें पर्वत तथा पशुओं के योगदान को स्मृति में रखना ही होगा । इसी कारण इस दिन गाय बैल को नहा कर रंग लगाया जाता है तथा गले की रस्सी को बदला है । गाय और बैल को इस दिन चावल तथा गुड खिलाया जाता है।
हम गोवर्धन पूजा का महत्व सिर्फ धार्मिक रूप में नहीं देख सकते इसके और सामाजिक तथा प्राकृतिक आयाम भी है। हम इस दिन गायों की पूजा करते है ।शास्त्रो में गाय को उतना ही पवित्र माना गया है जितना की नदियों में गंगा को । गाय को माता लक्ष्मी का स्वरुप भी कहा गया है देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृधि देती है उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रुपी धन प्रदान करती है। गाय सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय तथा आदरणीय है। हम इन्हे माँ का दर्जा देते है ।
हमारे देश में गो हत्या पर प्रतिबन्ध है पर हमारे देश के कई हिस्से में चोरी छिपे गो हत्या की जाती है । आइये हमारे हिन्दू धर्म इस अद्भुत दर्शन जिसमे हम पर्यावरण की तथा प्रकृति की सहज रिश्ते की बात करते है को एक संकल्प पर्व के रूप में मनाएं । हम एक संकल्प ले की हम अपने स्तर पर गो रक्षा की भरपूर कोशिश करेंगे तथा प्रकृति मनुष्य के सम्बन्ध को और अधिक सहज बनाने का प्रयास करेंगे
शुभमंगल से शुध्मंगल तक
हर घर में अब दीप जले
उन्नति पथ पर देश चले
लौ बने सम्मान का सूचक
पुरुषार्थ हमारा तेल बने
आस्था के इस परकाष्ठा को
आओ चले दिव्यार्थ करे
मन के तन के कालिमा को
दिव्या प्रकाश से दूर करे
ऐसे संवारे इस संसार सभ्य समाज को
जंहा हर आँगन में भीड़ बढे
उस भीड़ में शामिल रमा गणेश
रिधि सिदिः व शुभ लाभ रहें
इनके आशीष और मंगल्धाव्नी सुन
मंगलमय संसार रहे
शुभ मंगल हो सुध्मंगल हो
हेम तो बस उल्लास करे
Thursday, 23 October 2014
अन्धकार से युद्ध यह चलता रहे
पर्व है पुरुषार्थ का
दीप के दिव्यार्थ का
दीप के दिव्यार्थ का
देहरी पर दीप एक जलता रहे
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे
हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा
दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है
आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!
झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!
दीपोत्सव की शुभकामनाएं!!
कवि- विकास गाँधी
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